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1947-48 के Indo-Pak युद्ध के नायक और 8वीं सदी के कश्मीर शासक के नाम ज़ोजिला टनल के पोर्टल रखें: राउत

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बनने वाले महत्वपूर्ण ज़ोजिला टनल के ड्रास/लद्दाख पोर्टल का नाम सम्राट ललितादित्य मुक्तापिद के नाम पर रखने का सुझाव एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। सेना के उन्नत बीटी (UBT) नेता ने इस विषय पर 10 जून 2026 को अपनी बात एक पत्र के माध्यम से रखी, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” पर भी साझा किया।

सम्राट ललितादित्य मुक्तापिद, जिन्होंने आठवीं शताब्दी में कश्मीर का राज किया था, को उनके शौर्य, राज्य विस्तार और प्रशासनिक कुशलता के कारण इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यूबीटी नेता ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ड्रास क्षेत्र की भौगोलिक और सामरिक स्थिति को देखते हुए, इसका नाम ऐसे शासक के नाम पर होना बेहतर रहेगा जिन्होंने अपने समय में इस क्षेत्र की संपूर्ण सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित की थी।

उनका मानना है कि इस ऐतिहासिक नाम से न केवल उस क्षेत्र की महत्ता को उभारने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय जनता में भी एक गर्व और आत्मीयता की भावना जगेगी। इसके साथ ही, यह कदम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त करेगा।

ज़ोजिला टनल, जो कि देश की सबसे बड़ी सड़क सुरंगों में से एक है, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को जोड़ेगा और यातायात की सुविधा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इस टनल के निर्माण से क्षेत्र में असैन्य और सैन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा यह रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

इस प्रस्ताव पर विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की प्रतिक्रिया मिल रही है। कई विशेषज्ञ इसे स्वागत योग्य कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि इतिहास के अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।

इस विषय पर आगे की चर्चा और निर्णय संबंधित अधिकारियों के स्तर पर होने नजर आ रहे हैं। यह भी देखा जाएगा कि स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार इस सुझाव को किस प्रकार अपनाती है। फिलहाल, यह पहल इतिहास के गौरवशाली पन्नों को वर्तमान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आपको याद दिला दें कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जिनमें ज़ोजिला टनल सबसे महत्वपूर्ण है। इसके असर से ना सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी बल्कि यह सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के नए आयाम भी खोल सकता है।

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया इस विषय पर करीब से नजर बनाए हुए है और जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिए लगातार स्थानीय स्तर पर फीडबैक इकट्ठा किया जा रहा है। आने वाले दिन इस प्रस्ताव को लेकर कई बहसें और विमर्श सामने आ सकते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित विचार सुनिश्चित होगा।

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