असम में 1.85 लाख अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए शून्य शुल्क प्रवेश: मुख्यमंत्री

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में घोषणा की कि राज्य सरकार की फीस-छूट योजना के कारण 1.85 लाख से अधिक अंडरग्रेजुएट छात्र अपनी उच्च शिक्षा बिना किसी व्यवधान के जारी रख पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल छात्रों को वित्तीय भार से राहत देकर शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता प्रदान कर रही है।
सरमा ने कहा, “सरकार की फीस-छूट योजना शिक्षार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोग साबित हो रही है। इस योजना के तहत सभी अंडरग्रेजुएट छात्रों को पूरी तरह से शुल्क माफ कर दिया गया है, जिससे वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख सके हैं।” उन्होंने बताया कि इस योजना से शिक्षा में निरंतरता बनी रहती है और छात्रों को dropout होने से बचाया जा रहा है।
असम सरकार ने इस योजना को विशेष रूप से उन परिवारों के लिए सक्षम किया है जो कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य सरकार की शिक्षा नीति का एक अहम हिस्सा है, जिससे उच्च शिक्षा सभी के लिए सुलभ और समान हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें न केवल शिक्षा के प्रसार में सहायक होती हैं, बल्कि यह युवा शक्ति को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सरकार का प्रयास है कि हर छात्र को अपनी क्षमता के अनुसार अवसर मिले और वे देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।
इस योजना का लाभ उठाने वाले छात्रों ने भी अपनी संतुष्टि जताई है। कई छात्रों ने कहा है कि शुल्क माफ होने से उनकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आई और वे अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। अभिभावकों ने भी सरकार के इस निर्णय की सराहना की है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस अवसर पर अपील की है कि छात्र अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें और शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिबद्ध रहेगी और ऐसी ही योजनाएं जारी रखेगी।
इस तरह, असम सरकार की यह शून्य शुल्क प्रवेश योजना एक सकारात्मक कदम है जो राज्य के शैक्षणिक क्षेत्र में सुधार और विकास को मजबूती प्रदान कर रही है। इससे शिक्षा की पहुँच बढ़ेगी और असम का हर युवा अपने सपनों को साकार कर सकेगा।
