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मुंबई: CBI ने 62.42 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर कई ठिकानों पर छापेमारी की

मुंबई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई स्थित एक फर्म और उसके कई साझेदारों के खिलाफ 62.42 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज किया है। भारतीय बैंक, एसएएम शाखा, मुंबई की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है।

केंद्र की जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि संदिग्ध फर्म और अन्य अज्ञात आरोपी मिलकर आपराधिक साजिश रचते हुए बैंक को झूठी एवं बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की गई वित्तीय जानकारी दी। इस फर्जीवाड़े के चलते उन्होंने भारतीय बैंक और एक अन्य बैंक से कैश क्रेडिट की सुविधा हड़प ली, जिससे बैंकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

यह बैंक धोखाधड़ी लगभग 62.42 करोड़ रुपए की बताई जा रही है, जिसके आधार पर सीबीआई ने 20 जून को मुंबई समेत कई अन्य स्थानों पर आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की। ये छापेमारी विशेष न्यायालय, सीबीआई मामलों, मुंबई के आदेशानुसार सर्च वारंट के तहत की गई।

जांच के दौरान जांच एजेंसी ने महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें ऐसे देनदारों के रिकॉर्ड शामिल हैं जिनकी वास्तविकता की जांच की जा रही है। इसके अलावा खातों में छुपी हेराफेरी और बैंक ऋण बढ़ाने के आरोपों से जुड़े कागजात भी बरामद हुए हैं।

सीबीआई अधिकारीयों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जो भी व्यक्ति या अधिकारी इस धोखाधड़ी में संलिप्त पाए जाएंगे, उनकी कड़ी से कड़ी जांच की जाएगी। जांच में इस बात की भी पड़ताल हो रही है कि इस ऋण राशि का असली इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया।

इसके अतिरिक्त, सीबीआई ने एक अन्य अहम मामले में बताया कि वह कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके चालक की हत्या मामले में सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

यह उच्च-profile मामला 3 जून 2006 को नवी मुंबई में दिनदहाड़े हुई हत्या से जुड़ा है। विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री और पूर्व एनसीपी सांसद पद्मसिंह बाजीराव पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

सीबीआई का कहना है कि वह न्याय मिलने तक इस मामले की लड़ाई कोर्ट में जारी रखेगी।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कानून व्यवस्था के उल्लंघन और आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां कैसे कार्रवाई कर रही हैं, ताकि न्याय व्यवस्था के जरिए अपराधियों को उनके उचित दंड तक पहुंचाया जा सके।

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