अब कोई गुट नहीं, सिर्फ एक ही शिवसेना है: अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर तंज

कोल्हापुर। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना को लेकर जारी गुटबंदी और उठापटक के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अब राज्य में कोई गुट नहीं बचा है, बल्कि केवल एक ही सच्ची शिवसेना है, जिसका नेतृत्व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। यह बयान उन्होंने कोल्हापुर में महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर विकास और कॉरिडोर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखते हुए दिया।
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले शिवसेना के विभिन्न गुटों को अलग-अलग कहा जाता था, लेकिन अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सिर्फ एक शिवसेना ही सक्रिय है। उन्होंने शिंदे का परिचय ‘शिवसेना के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री’ के रूप में करवाकर महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा संकेत दी।
केंद्रीय मंत्री के इस बयान को ‘ऑपरेशन टाइगर’ से जोड़ा जा रहा है, जो कि महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर चल रहे राजनीतिक वर्चस्व के लिए किए जा रहे प्रयासों का कोड नाम माना जाता है। इस ऑपरेशन के तहत उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक हलचल तब और तेज हो गई जब इस सप्ताह की शुरुआत में शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने दिल्ली में ठाकरे की बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिससे पार्टी के भीतर गुटबंदी और पार्टी अनुशासन की स्थिति जटिल हो गई।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को एक सभा में इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह तो बस ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है।” उन्होंने आलोचकों पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि वे जो विरोध कर रहे हैं, वे असली शिवसेना की ताकत के सामने टिक नहीं पाएंगे।
शिंदे ने कहा, “मैं देख रहा हूं कि कुछ लोग रोजाना विरोध कर रहे हैं, लेकिन मैं आपको बताता हूं कि कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, जबकि शेर अकेला चलता है।” उन्होंने उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के बयानों का भी अप्रत्यक्ष रूप से जवाब दिया।
इससे पहले, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने चेतावनी दी थी कि बागी विधायक यदि अपने क्षेत्र में आएंगे तो पार्टी कार्यकर्ता उन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। शिंदे ने इस चेतावनी का भी जवाब अपने आक्रामक अंदाज में दिया।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस संघर्ष और गुटबंदी की स्थिति को लेकर विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि आने वाले समय में इस दल में और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित करेंगे।
यह राजनीतिक घटनाक्रम शिवसेना के लिए नए बदलावों का संकेत हैं, जहां अब केवल एक ही शिवसेना की बात हो रही है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे मजबूत स्थिति में हैं। उद्धव ठाकरे और उनकी टीम के लिए यह स्थिति अब और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
