समझौते से पहले ही ईरान ने बनाई जीत की कहानी, अमेरिका पर साधा निशाना

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन समझौते के अंतिम स्वरूप से पहले ही ईरान ने इसे अपनी बड़ी रणनीतिक जीत बताना शुरू कर दिया है। तेहरान का कहना है कि उसने वर्षों तक दबाव झेलने के बावजूद आत्मसमर्पण नहीं किया।
ईरानी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि अमेरिका और इजरायल की कठोर नीतियों के बावजूद ईरान ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। सरकारी मीडिया इसे “प्रतिरोध की जीत” के तौर पर प्रचारित कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इतिहास में कई ताकतवर साम्राज्य टूटे हैं और आज ईरान ने भी यह साबित किया है कि वह किसी दबाव में नहीं झुकेगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान घरेलू स्तर पर जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए इस नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है। आर्थिक संकट और प्रतिबंधों के चलते सरकार पर लगातार दबाव बना हुआ है।
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की एली गेरानमायेह ने कहा कि अमेरिका की भाषा में बदलाव ईरान के लिए बड़ी उपलब्धि की तरह देखा जा रहा है। पहले जहां आत्मसमर्पण की बात हो रही थी, वहीं अब बातचीत और समझौते पर जोर दिया जा रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को लगता है कि उसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी अहमियत साबित कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी रणनीतिक स्थिति अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
हालांकि, आर्थिक मोर्चे पर हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण हैं। प्रतिबंधों के कारण उद्योग प्रभावित हुए हैं और तेल निर्यात में गिरावट आई है। जनता को महंगाई और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
यदि संभावित समझौते के तहत प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकता है। यही कारण है कि तेहरान इसे अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
