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सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति, आज दिलाई जाएगी शपथ; महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो स्वीकृत 38 पदों से केवल एक कम है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत मंगलवार को नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

नवनियुक्त न्यायाधीशों में चार मुख्य न्यायाधीश विभिन्न हाई कोर्ट से पदोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिटा सुब्रमणि मोहना को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि वह सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली दूसरी महिला हैं।

इससे पहले इंदू मल्होत्रा को वर्ष 2018 में सीधे अधिवक्ता से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद अब मोहना इस श्रेणी में दूसरी महिला न्यायाधीश बनी हैं। इसके साथ ही वह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला जज भी बन गई हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नियुक्त किए गए अन्य चार न्यायाधीशों में शील नागू, श्री चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा और अरुण पल्ली शामिल हैं। इन सभी को विभिन्न उच्च न्यायालयों से पदोन्नत कर सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। वर्तमान में बी.वी. नागरत्ना सर्वोच्च अदालत की एकमात्र महिला न्यायाधीश थीं। न्यायिक परंपरा के अनुसार, वह वर्ष 2027 में कुछ समय के लिए देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने जा रही हैं।

गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को इन पांच नामों की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की अनुशंसा के महज चार दिनों के भीतर केंद्र सरकार ने नियुक्तियों को मंजूरी दे दी, जिसे न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में एक तेज और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। बढ़ते मुकदमों के बोझ और लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। नई नियुक्तियों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में केवल एक पद रिक्त रह गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम लोगों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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