पैंक्रियाटिक कैंसर के खिलाफ बड़ी कामयाबी: नई दवा ने दोगुना किया मरीजों का जीवनकाल, रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे खतरनाक और तेजी से फैलने वाले कैंसरों में शामिल पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज को लेकर एक बड़ी उम्मीद सामने आई है। हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि एक एक्सपेरिमेंटल दवा ने एडवांस स्टेज के मरीजों की जीवन अवधि को लगभग दोगुना कर दिया है। इस खोज को कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।
पैंक्रियाटिक कैंसर को अब तक इलाज के सबसे मुश्किल कैंसरों में से एक माना जाता रहा है, क्योंकि यह अक्सर देर से पकड़ में आता है और तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। ऐसे में इस नई दवा ने चिकित्सा जगत में उम्मीद की नई किरण जगा दी है।
क्या है नई दवा और कैसे करती है काम?
इस दवा का नाम डैराक्सोनरासिब (Daraxonrasib) बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पैंक्रियाटिक कैंसर के 90% से अधिक मामलों में एक म्यूटेटेड प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा देता है। वर्षों से वैज्ञानिक इस प्रोटीन को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं मिल पाया था।
नई दवा इसी म्यूटेटेड प्रोटीन को टारगेट करके उसे ब्लॉक करती है, जिससे कैंसर सेल्स की बढ़त धीमी पड़ जाती है।
रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे
यह अध्ययन प्रतिष्ठित न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है और इसे हाल ही में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की बैठक में प्रस्तुत किया गया।
इस रिसर्च में करीब 500 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनका कैंसर एडवांस स्टेज में था और जिन पर पहले का इलाज असर नहीं कर रहा था। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया—एक को यह नई टैबलेट दी गई और दूसरे को कीमोथेरेपी।
नतीजों में पाया गया कि नई दवा लेने वाले मरीज औसतन 13.2 महीने तक जीवित रहे, जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों की औसत जीवन अवधि 6.7 महीने रही। यानी लगभग दोगुना अंतर देखा गया।
साइड इफेक्ट्स कम, जीवन की गुणवत्ता बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार, इस दवा के साइड इफेक्ट्स कीमोथेरेपी की तुलना में कम और हल्के पाए गए। कई मरीजों में ट्यूमर का आकार घटने से दर्द में भी राहत मिली और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार देखा गया।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ दवा का असर कुछ मामलों में कम हो सकता है, लेकिन फिर भी यह कीमोथेरेपी के मुकाबले बेहतर परिणाम देती है।
आगे की दिशा क्या होगी?
वैज्ञानिक अब इस दवा के उपयोग को बीमारी के शुरुआती चरणों में आजमाने की संभावना पर भी काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य यह जानना है कि क्या शुरुआती इलाज से मरीजों में सर्जरी की संभावना बढ़ सकती है और बीमारी को और बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि इस दवा के कुछ साइड इफेक्ट्स जैसे त्वचा पर रैशेज और मुंह में छाले देखे गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आगे के इलाज को और सुरक्षित बनाने पर काम किया जाएगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में यह नई दवा एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि यह अभी पूरी तरह से इलाज नहीं है, लेकिन मरीजों की जीवन अवधि और जीवन गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
