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अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में सोलर ड्रोन निर्माण की शुरुआत, NRT का निवेश बढ़ाएगा रोजगार और रक्षा उत्पादन

अलीगढ़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की नीति को बड़ी मजबूती मिलती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अब अत्याधुनिक सोलर पावर्ड ड्रोन का निर्माण किया जाएगा। बेंगलुरु स्थित रक्षा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी कंपनी न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) ने यहां मानव रहित विमान (यूएवी) निर्माण इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से 3.5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है और फैक्ट्री निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय से सोलर पावर्ड यूएवी की आपूर्ति का ऑर्डर मिलने के बाद इस परियोजना को और गति मिली है।

डिफेंस कॉरिडोर में एनआरटी की एंट्री को अलीगढ़ के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से ताला और हार्डवेयर उद्योग के लिए पहचाने जाने वाले अलीगढ़ को अब रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इस निवेश से न केवल रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ेगा, बल्कि इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन और यूएवी तकनीक आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल होगी, ऐसे में अलीगढ़ का यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से भी काफी अहम साबित हो सकता है।

यूपीडा और राज्य सरकार की पहल पर विकसित किए जा रहे अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में अब तक कई निवेश प्रस्ताव आए हैं, लेकिन अब कंपनियों द्वारा निर्माण कार्य शुरू होने से यह परियोजना धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। एनआरटी की प्रस्तावित इकाई में आधुनिक ड्रोन, सोलर यूएवी और उनसे जुड़ी उन्नत प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सेना, सीमा सुरक्षा बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए ड्रोन की मांग लगातार बढ़ रही है। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, सीमा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है।

सोलर ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी ऊर्जा दक्षता है। इनकी बैटरियां सूर्य की किरणों से चार्ज होती हैं, जिससे ये लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी और अन्य मिशनों को अंजाम दे सकते हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा ऐसे ड्रोन की खरीद को मंजूरी दिए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों पर अधिक भरोसा कर रही हैं। इससे देश में ड्रोन निर्माण उद्योग को भी नई गति मिलेगी।

एनआरटी का निवेश स्थानीय उद्योगों के लिए भी अवसरों के नए द्वार खोलेगा। ड्रोन निर्माण में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, सेंसर, मेटल फैब्रिकेशन, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी उपकरणों की जरूरत होती है। इससे अलीगढ़ और आसपास के उद्योगों को रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। स्थानीय उद्यमियों को नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे और छोटे तथा मध्यम उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर की सफलता में क्षेत्र की मजबूत कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां बेहतर सड़क नेटवर्क, औद्योगिक बुनियादी ढांचा और निकट भविष्य में शुरू होने वाला जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट निवेशकों को आकर्षित करने में मदद करेगा। एलन एंड एलवन के चेयरमैन धनजीत वाड्रा के अनुसार, अलीगढ़ नोड निवेश और रक्षा उद्योगों के लिए कई दृष्टियों से उपयुक्त स्थान है और आने वाले वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

यूपीडा के समन्वयक संजय सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रभाव अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु की कंपनी द्वारा सोलर ड्रोन निर्माण इकाई स्थापित करने का कार्य शुरू हो चुका है और इस परियोजना से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि सोलर ड्रोन की बैटरियां सूर्य की ऊर्जा से चार्ज होंगी, जिससे उनकी परिचालन क्षमता और उपयोगिता बढ़ेगी।

अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में सोलर ड्रोन निर्माण इकाई की स्थापना को क्षेत्र के औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह परियोजना रोजगार, निवेश और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है तथा भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को और मजबूती प्रदान कर सकती है।

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