फिर टूटने की कगार पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना! सांसदों के दलबदल की चर्चा तेज, संजय राउत ने लगाया बड़ा आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम उभरकर सामने आ रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के संपर्क से बाहर रहने और उनके दूसरी राजनीतिक पार्टियों के साथ जुड़ने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ बयानबाजी तेज हो गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट शिवसेना की स्थिरता के लिए नए प्रश्न खड़े कर सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों से संपर्क कटना और उनकी निष्ठा पर सवाल उठना स्पष्ट संकेत हैं कि पार्टी के भीतर गंभीर संकट चल रहा है।
सांसदों के कटे संपर्क को लेकर चिंता
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ हफ्तों से कई सांसद कम सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, उनके मोबाइल बंद रहने व संपर्क न होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे हालात में पार्टी की कार्यकारिणी ने तुरंत दिल्ली में संसदीय दल की विशेष बैठक बुलाई है ताकि स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके।
संजय राउत का बड़ा आरोप
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने कुछ दिन पहले ट्वीट और अन्य माध्यमों से एक बड़ा आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ सांसदों को खरीदने के लिए विशेष धनराशि की पेशकश की जा रही है। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे अनुचित हस्तक्षेप बताया। हालांकि, इस आरोप पर किसी भी पक्ष से आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
इसी बीच शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें पार्टी की संसदीय पहचान और अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है। पत्र में मांग की गई है कि किसी भी प्रतिनिधि समूह को मान्यता देने से पहले मूल पार्टी को बोलने का मौका दिया जाए। साथ ही दल-बदल विरोधी कानून की भी याद दिलाई गई है।
आदित्य ठाकरे की भूमिका पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर पर यह भी है कि कुछ नेताओं के बीच आदित्य ठाकरे की बढ़ती प्रभावशीलता को लेकर असंतोष व्याप्त है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस तरह की चर्चाओं से इनकार किया है और कहा है कि पूरी पार्टी एक साथ खड़ी है।
शिवसेना का भविष्य और राजनीतिक माहौल
गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के दो गुटों में विभाजन के बाद से पार्टी की स्थिति नाजुक बनी हुई है। वर्तमान में जो अटकलें हो रही हैं, वे फिर से महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दे रही हैं।
फिलहाल शिवसेना नेतृत्व यह दावा करने में लगा है कि उसके सभी सांसद पार्टी के प्रति वफादार हैं और किसी भी बाहरी प्रलोभन को स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि आने वाले समय में शिवसेना के अंदरूनी गतिशीलता और सांसदों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ये संकेत आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर सकते हैं।
