महाराष्ट्र

फिर टूट सकती है उद्धव ठाकरे की शिवसेना! सांसदों के पाला बदलने की खबरें तेज, संजय राउत ने लगाया गंभीर आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूपीटी) के कई सांसदों के संपर्क से बाहर होने और उनके संभावित पाला बदलने की खबरें राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कुछ सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना गुट से संपर्क में हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इन चर्चाओं के बीच, पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि अंदरूनी स्थिति को मजबूत किया जा सके।

सांसदों के संपर्क से टूटने पर बढ़ी चिंता

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूपीटी) के कुछ सांसद हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से कम सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। कई सांसदों के फोन बंद होने और उनसे संपर्क नहीं हो पाने की खबरों ने संभावित बगावत की चर्चाओं को और हवा दी है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पार्टी ने दिल्ली में संसदीय दल की आपात बैठक बुलाई है। वरिष्ठ नेता सांसदों के साथ संवाद कर वर्तमान स्थिति को समझने और समाधान निकालने में जुटे हुए हैं।

संजय राउत का बड़ा आरोप

शिवसेना (यूपीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को प्रभावित करने के लिए बड़ी धनराशि की पेशकश की जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि कुछ बाहरी ताकतें सांसदों की खरीद-फरोख्त कर रही हैं।

हालांकि, इस आरोप पर संबंधित पक्षों से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी गंभीर मांगों की जांच और प्रमाण के बिना पुष्टि करना मुश्किल है।

लोकसभा अध्यक्ष को सांसद का पत्र

इसी बीच शिवसेना (यूपीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखकर पार्टी की संसदीय पहचान और अधिकार पर अपना पक्ष रखा है।

पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि कोई समूह पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, तो उससे पहले मूल पार्टी को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची, जो दल-बदल विरोधी कानून है, का भी उल्लेख किया गया है।

आदित्य ठाकरे की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी में आदित्य ठाकरे की बढ़ती भूमिका को लेकर कुछ नेताओं में असंतोष है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

यह ध्यान देने योग्य है कि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से शिवसेना दो गुटों में बंटी हुई है, और मौजूदा अटकलें फिर से महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा रही हैं।

सभी की नजरें अगले कदम पर

फिलहाल, शिवसेना (यूपीटी) नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि उसके सभी सांसद पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। वहीं, राजनीतिक चर्चाएं और संभावित दलबदल की अफवाहें सियासी माहौल को गर्म बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी की बैठकों और सांसदों की गतिविधियों से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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