नियमित योगाभ्यास से स्वस्थ उम्र बढ़ना संभव: एम्स

नई दिल्ली: देश में वृद्ध जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और इसे देखते हुए स्वस्थ ageing को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाना अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बुधवार को कही। उन्होंने बताया कि स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग जैसे सरल और प्रभावी उपायों को जीवनशैली में अपनाना बेहद जरूरी है।
प्रोफेसर के अनुसार, वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि को रोकने तथा जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित योगाभ्यास एक सशक्त उपकरण साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे देश में शीघ्र ही 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि होगी। ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वे न केवल लंबी आयु पाएं, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय भी रहें।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के आधार पर, 2030 तक भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या लगभग 19.5 करोड़ हो जाएगी। यह वृद्धि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को और बढ़ाएगी। प्रोफेसर ने यह भी उल्लेख किया कि स्वस्थ ageing के लिए न केवल चिकित्सकीय उपायों की जरूरत है, बल्कि मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
योगाभ्यास के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह न केवल शारीरिक कठोरता को कम करता है, बल्कि तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं को भी नियंत्रित करने में सहायक है। विशेषकर वृद्ध वयस्कों में योग के नियमित अभ्यास से हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा, “योग के सरल आसन, प्राणायाम एवं ध्यान वृद्धों के लिए शारीरिक सहजता और मानसिक शांति का कारक हैं।”
AIIMS के इस विशेषज्ञ का सुझाव है कि वृद्धजन नियमित योग क्लासेस में हिस्सा लें और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस महत्व की जानकारी दें ताकि पूरे परिवार के स्वास्थ्य में सुधार हो सके। इसके अलावा उन्होंने अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा स्थानीय निकायों को योग और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए संगठित प्रयास करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
स्वस्थ ageing पर यह चर्चा तब सामने आई है जब विश्व भर में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है लेकिन अनेक देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती बनी हुई है। प्रोफेसर ने खत्म करते हुए कहा, “स्वस्थ जीवन का राज केवल दवाइयों या तकनीक में नहीं है, बल्कि जीवनशैली में सुधार, योग, संतुलित आहार और सामाजिक सक्रियता में निहित है।”
