Ebola Virus: अफ्रीका में बढ़ते खतरे के बीच भारत की बड़ी पहल, मेडिकल सहायता की पहली खेप रवाना

अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस संक्रमण के बीच भारत ने मानवीय सहयोग का बड़ा कदम उठाते हुए जरूरी मेडिकल सप्लाई और सुरक्षा किट की पहली खेप अफ्रीकी देशों के लिए रवाना कर दी है। यह सहायता अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) को भेजी गई है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस स्वास्थ्य संकट के दौरान अफ्रीकी देशों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग जारी रखेगी।
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में अपने सहयोगी देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल उपकरण, सुरक्षा किट और आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री की यह पहली खेप प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में मदद करेगी।
WHO ने घोषित किया सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल
विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम 2005 के तहत लिया गया। इसके बाद कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
अफ्रीका CDC ने भी इस प्रकोप को “महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” बताया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण संक्रमण फैल रहा है, जो इबोला वायरस का एक गंभीर प्रकार माना जाता है।
भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी
भारत सरकार ने अपने नागरिकों को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि जो भारतीय नागरिक इन देशों में मौजूद हैं, उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है। एयरपोर्ट्स और स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
कितना खतरनाक है इबोला वायरस?
पूर्व एम्स निदेशक Randeep Guleria के अनुसार, इबोला एक अत्यंत गंभीर वायरल संक्रमण है जिसकी पहचान पहली बार 1976 में अफ्रीका में हुई थी। यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से संक्रमण बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि इबोला के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी, दस्त और गले में खराश शामिल हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को आंतरिक रक्तस्राव, अंग फेल होने और शॉक जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. गुलेरिया के मुताबिक इबोला की मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में गिना जाता है। हालांकि यह वायरस कोरोना की तरह हवा से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित बॉडी फ्लूइड के सीधे संपर्क से फैलता है। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिनों तक हो सकता है।
रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर आइसोलेशन, संक्रमित मरीजों से दूरी, मेडिकल सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल और सख्त संक्रमण नियंत्रण उपाय इबोला को फैलने से रोकने में सबसे प्रभावी साबित होते हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि संक्रमण को अफ्रीका तक सीमित रखा जा सके और वैश्विक स्तर पर इसके फैलाव को रोका जा सके।
