अपराध
“वो हमेशा मुस्कुराता था…” — आशीष की याद में एक परिवार की चुप्पी

घड़ी जैसे रुक गई है उस रात के बाद से।
आशीष अब नहीं है, लेकिन उसकी मुस्कान, उसकी बातें हर कोने में गूंजती हैं।
28 साल का था, पूरे परिवार की उम्मीद था। मां नर्स हैं, बेटा हमेशा कहता था — “मां, एक दिन मैं आपको कार में मंदिर लेकर जाऊँगा।”
वही बोलेरो अब खामोश है, और मां अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ रही हैं।
पिता बस खिड़की से सड़क को देखते रहते हैं — शायद उम्मीद करते हैं कि बेटा दरवाज़ा खोलेगा।
हादसे की खबर जिसने भी सुनी, उसकी आंखें भर आईं।
परिवार, मित्र, गांव वाले — सब कहते हैं, “आशीष बहुत अच्छा लड़का था, सबकी मदद करता था।”
कभी-कभी ज़िंदगी इतनी बेरहम हो जाती है कि कोई आखिरी अलविदा भी नहीं कह पाता।
