राष्ट्रीय
“जब डीएम ने कहा – अब बहाने नहीं, केवल परिणाम”

मुझे आज भी वह दिन याद है।
कलेक्ट्रेट सभागार खचाखच भरा था।
डीएम डॉ. राजागणपति आर. आए और बैठक शुरू हुई।
उनकी आंखों में दृढ़ता थी — किसी को डांटने की नहीं, सुधार की।
जब उन्होंने तालाब सौंदर्यीकरण में देरी का मुद्दा उठाया, तो माहौल गंभीर हो गया।
“काम शुरू करो, नहीं तो वेतन रुकेगा,” उन्होंने कहा।
वह पल मेरे लिए एक सीख थी — प्रशासन में अनुशासन सबसे जरूरी है।
बैठक खत्म होने के बाद मैंने महसूस किया कि यह केवल समीक्षा नहीं थी, बल्कि एक प्रेरणा थी।
हर अधिकारी के मन में अब जिम्मेदारी का भाव था।
डीएम की बातों में सख्ती जरूर थी, पर उद्देश्य साफ था — सीतापुर को नया रूप देना।
आज जब मैं किसी वार्ड का निरीक्षण करता हूं, तो उनकी आवाज अब भी कानों में गूंजती है —
“काम में ईमानदारी ही असली विकास है।”
