“भ्रष्टाचार पर नकेल: चिड़ावा की कार्रवाई एक चेतावनी है”

एसीबी की चिड़ावा कार्रवाई केवल दो अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक संदेश है —
“अब जनता चुप नहीं रहेगी।”
राजविका मिशन की ब्लॉक प्रभारी रेणुका और उनके सहयोगी धर्मेंद्र का रिश्वत लेना दिखाता है कि कैसे स्थानीय स्तर पर भी भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है।
हर छोटी फाइल, हर भुगतान, हर हस्ताक्षर — सबका दाम तय हो गया है।
यह कार्रवाई बताती है कि कानून की ताकत तभी दिखती है, जब शिकायत करने वाले जागरूक हों।
एसीबी की सक्रियता प्रशंसनीय है, लेकिन इस समस्या की जड़ प्रणाली में है।
यदि भर्ती, निगरानी और जवाबदेही मजबूत न हो, तो ऐसे “छोटे” भ्रष्टाचार धीरे-धीरे पूरे ढांचे को खोखला कर देंगे।
आवश्यक है कि शासन स्तर पर ठोस सुधार हों —
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महिला एवं बाल विकास योजनाओं की स्वतंत्र ऑडिटिंग,
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स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करना,
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और भ्रष्टाचारियों पर शीघ्र न्यायिक कार्रवाई।
चिड़ावा की कार्रवाई ने जनता को भरोसा दिया है कि कानून सोया नहीं है।
पर यह तभी सार्थक होगा जब ऐसी खबरें “अपवाद” नहीं बल्कि “नियम” बन जाएँ।
