राजनीति

‘वोट लूटकर सत्ता में बैठे लोग’, ममता ने 150 सीटों पर गड़बड़ी का दावा दोहराया; लोकतंत्र पर उठाए सवाल

 पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने वोट लूट, ईवीएम में गड़बड़ी और चुनाव बाद हिंसा का दावा करते हुए प्रशासन और लोकतंत्र की स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव परिणामों के तीन सप्ताह बाद रविवार को एक बार फिर आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव नहीं हारी है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने भाजपा को राज्य में जीत दिलाने में मदद की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उन्हें बलपूर्वक हराया गया।जहां हारे वहां जीत दिखाई गई: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने दावा किया कि लगभग 150 सीटों पर परिणामों में हेरफेर किया गया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो उनकी पार्टी 220 से 230 सीटें जीत सकती थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में विपक्ष चुनाव जीता है तो लोग संतुष्ट क्यों नहीं हैं? कुछ लोग माथे पर पट्टी बांधकर बाइक में निकल रहे हैं और लोगों के घर और पार्टी दफ्तरों को लूट रहे हैं। मां-बहनों के आत्मसम्मान को लूट रहे हैं। लोग खुलकर बोल भी नहीं पा रहे हैं।

फलता विधानसभा उपचुनाव के परिणाम घोषित होने के दिन बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप भवानीपुर में कैसे जीते? मैं आपको अदालत में बताऊंगी। अगर आपमें हिम्मत है, तो फोरेंसिक रिपोर्ट ले आइए। हमें ईवीएम रिपोर्ट चाहिए।

चुनाव बाद हिंसा और प्रशासन पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंक फैलाया है और पुलिस तृणमूल नेताओं और पार्षदों को गिरफ्तार कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 2,000 तृणमूल कांग्रेस कार्यालयों में लूटपाट हुई है।

ममता बनर्जी ने कहा “अगर (शुभेंदु अधिकारी) कहते हैं कि मैं 2,500 लोगों को जेल भेजूंगा, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए अलग से जेल बनाई गई है… मुझे लगता है कि उन्हें पहले जेल जाना चाहिए। सारदा से लेकर नारदा तक, हर घोटाले में उनका नाम है। आज जो लोग आदेश दे रहे हैं, वे नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।”  उन्होंने कहा “मैंने भी इतने वर्षों तक प्रशासन चलाया है। जो लोग पुलिस की वर्दी पहनकर काम करते हैं, उनके प्रति हमारी श्रद्धा है। इन लोगों ने मेरे साथ भी काम किया है, लेकिन हमने कभी इन लोगों को ये सब करने नहीं बोला। हम ऐसी चीजों पर भरोसा नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा कि मतगणना 4 मई को हुई थी। आज 24 तारीख है। मैंने ये 20 दिन चुपचाप सहन किए हैं। सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि बंगाल की जनता और तृणमूल कार्यकर्ता भी सहन कर रहे हैं। कई लोग राज्य आतंकवाद का शिकार हुए हैं। लगभग 12 लोगों की मौत हो चुकी है। लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर किया जा रहा है। सभी को इस्तीफा लिखने के लिए मजबूर किया जा रहा है। निर्वाचित निकायों को काम नहीं करने दिया जा रहा है। कोलकाता नगर निगम जैसे प्रमुख नागरिक निकायों के विकास कार्यों में बाधाएं हैं, जिनमें जल आपूर्ति, सड़कें और अन्य सेवाएं शामिल हैं। हम 2011 में सत्ता में आए और हर जगह रवींद्र संगीत बजाया। आज हमें बैठकें करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

पार्षदों की गिरफ्तारी और पार्टी दफ्तरों पर कब्जे का आरोप
बनर्जी ने कहा कि ऐसी स्थिति हो गई है कि अब किसी भी कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं मिल रही है। प्रतिदिन उनके निर्वाचित पार्षदों को गिरफ्तार किया जा रहा है और गुंडों द्वारा निगम पार्षदों के घरों पर कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 2500 से ज्यादा पार्टी दफ्तरों पर कब्जा कर लिया गया है, और यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ। जब उनके नेता पुलिस को फोन करके इसकी सूचना दे रहे हैं, तो पुलिसकर्मी कह रहे हैं कि उन्हें ऐसा करने का निर्देश मिला है। उन्होंने कहा कि जो लोग वोट लूटकर सत्ता में बैठे हैं, वे जनता का दुख कैसे समझेंगे।

न्यायपालिका से गुहार और संवैधानिक लड़ाई का संकल्प
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और लोगों को ‘आतंक’ का शिकार बताते हुए ममता बनर्जी ने लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को एक संदेश में कहा कि जब कल्याणी एक्सप्रेस सेतु का निर्माण हुआ था, तो 43 घर प्रभावित हुए थे और उन्होंने उनके पुनर्वास के लिए ठीक वैसे ही 43 घर बनाए थे। अब लूटपाट, तोड़फोड़ और सभी निशान मिटाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब दिल्ली में आप सत्ता से गिरेंगे, तो आपको अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा, हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने न्यायपालिका को याद दिलाया कि वे कानून के सच्चे रक्षक हैं। बनर्जी ने कहा कि वह राज्य के आतंकवाद के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी और यह देखेंगी कि संविधान की शक्ति अधिक है या बंदूक की नली की।

प्रतिमा ध्वस्त करने पर सवाल
एक अन्य मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने हैरानी जताते हुए कहा “मुझे बहुत बुरा लग रहा है, मैंने इसे एक कलाकार से बनवाया था। मैंने ही इसका लोगो डिजाइन किया था।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसे इसलिए ध्वस्त किया गया क्योंकि आप अपनी प्रतिमा स्थापित करना चाहती थीं? यह सवाल उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर पूछा।

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