सड़क पर नमाज गलत है तो सभी धार्मिक आयोजनों पर भी समान नियम लागू हों” : ओवैसी ने लगाया दोहरे मापदंड का आरोप

नई दिल्ली: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र और राज्य सरकारों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि सड़कों पर नमाज अदा करना गलत माना जाता है, तो सभी धर्मों के त्योहारों, जुलूसों और सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों पर भी समान रूप से नियम लागू किए जाने चाहिए।
शुक्रवार को आयोजित एक ‘ईद मिलाप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए और किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर नियम नहीं बनाए जाने चाहिए।
ओवैसी ने कहा, “अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है, तो फिर हर धर्म के त्योहारों के दौरान सड़कों पर निकलने वाले जुलूस और धार्मिक कार्यक्रम भी गलत होने चाहिए। कानून और नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि नमाज और अजान को लेकर बार-बार आपत्तियां उठाई जाती हैं, जबकि अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान होने वाली सड़क बंदी या यातायात प्रभावित होने जैसे मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
उन्होंने मांस की दुकानों को लेकर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि यदि कुछ हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो रमजान के दौरान शराब की दुकानों को भी बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि आखिर एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए जाते हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक मुद्दों को बड़े त्योहारों से पहले जानबूझकर उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि रमजान, ईद या बकरीद जैसे अवसरों पर अजान और नमाज को लेकर विवाद खड़े किए जाते हैं, जिससे समुदाय विशेष को निशाना बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
ओवैसी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज तय स्थानों पर और व्यवस्थित तरीके से पढ़ी जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इसे अलग-अलग शिफ्टों में भी आयोजित किया जा सकता है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
वहीं पश्चिम बंगाल में ईद की पारंपरिक नमाज को कोलकाता के रेड रोड के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन का तर्क था कि सार्वजनिक सड़कों पर भीड़ और यातायात बाधित होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर देश में लंबे समय से बहस जारी है। ओवैसी के ताजा बयान ने इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है।