महाराष्ट्र

शिवसेना यूबीटी और सपा में बड़ी टूट के संकेत, राहुल गांधी युवाओं को भड़काने में लगे: संजय निरुपम

मुंबई। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) में अंदरूनी कलह के कारण बड़ी टूट के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही समाजवादी पार्टी में भी टूट की संभावना उजागर हुई है।

संजय निरुपम ने कोटा में राहुल गांधी के छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम को पूर्व-नियोजित बताया और आरोप लगाया कि राहुल गांधी युवाओं में असंतोष फैला कर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नीट, सीबीएसई जैसे मुद्दों पर भड़काया जा रहा है ताकि राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न की जा सके, लेकिन भारत का युवा राष्ट्रभक्त है और ऐसी राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है और नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसे देशों के साथ इसकी तुलना नहीं की जा सकती। राहुल गांधी की यह कोशिश विफल रहेगी और वे अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान हटाने में असफल होंगे।

शिवसेना (यूबीटी) में चल रही कलह पर निरुपम ने कहा कि नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद अलग समूह बनाने के लिए तैयार हैं और इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा गया है। उद्धव ठाकरे की संसदीय दल की बैठक में छह सांसद शामिल नहीं हुए, जो पार्टी में बढ़ते असंतोष का स्पष्ट संकेत है।

उन्होंने व्हिप जारी करने के मामले पर भी सवाल उठाया। निरुपम ने बताया कि संसदीय प्रणाली में व्हिप केवल विधायी कार्यों के लिए होता है और बैठक के लिए व्हिप जारी करना अनुचित है। इस गलत निर्णय से पार्टी की सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है।

संजय निरुपम ने कहा कि वर्तमान में एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राजनीतिक कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों का भरोसा बढ़ रहा है। कई क्षेत्रीय दलों के नेता भी एनडीए की ओर रुख कर रहे हैं और विकास तथा स्थिरता के लिए इसे सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी में भी बड़े पैमाने पर बगावत हो सकती है और कई सांसद एनडीए का समर्थन कर सकते हैं। केशव प्रसाद मौर्य के दावों का हवाला देते हुए निरुपम ने यह भविष्यवाणी की।

निरुपम ने यह भी कहा कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद अपने वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। विपक्ष कमजोर हो रहा है जबकि एनडीए की पकड़ मजबूत होती जा रही है।

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक परिदृश्य में बड़े परिवर्तन की संभावना ऊर्जा से काम कर रही है, और ये घटनाएं आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकती हैं।

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