मुंबई

शिवसेना यूबीटी और सपा में बड़ी टूट के संकेत, राहुल गांधी युवाओं को भड़का रहे हैं: संजय निरुपम

मुंबई। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने हाल ही में विपक्षी दलों और राजनीतिक स्थिति पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए बयान दिए हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर युवाओं को भड़काने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) में चल रही भीतरी कलह और समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

संजय निरुपम ने कोटा में राहुल गांधी द्वारा छात्रों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम को पूर्व-नियोजित करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ‘नीट’ और ‘सीबीएसई’ जैसे शिक्षा संबंधी मुद्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को सरकार के खिलाफ उकसा रहे हैं। उनकी मंशा युवाओं में असंतोष पैदा कर देश में अराजकता का माहौल बनाना है, लेकिन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि यह प्रयास सफल नहीं होगा। निरुपम ने आगे कहा कि भारत का युवा राष्ट्रवादी सोच रखता है और दंगा-फसाद जैसे दुर्भावनापूर्ण कार्यों में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।

उन्होंने विपक्षी दलों की तुलना पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से करते हुए कहा कि भारत में लोकतांत्रिक मूल्य समाज की गहराई तक जड़ें जमाए हुए हैं। राहुल गांधी की युवाओं को भड़काने की राजनीति उसकी असफलताओं से ध्यान हटाने की चाल है, जिसे देश का युवा समझ चुका है।

शिवसेना (यूबीटी) के अंदरूनी असंतोष और सांसदों के अलग समूह बनाने के प्रयासों का भी निरुपम ने जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है और ये सांसद हाल ही में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाए गए संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। यह स्थिति पार्टी के भीतर बढ़ती नराज़गी और तनाव को दर्शाती है।

संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे गुट द्वारा संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि संसदीय व्यवस्थाओं में व्हिप केवल विधानसभा या संसद में विधायी कार्यों के दौरान ही जारी किया जाता है, बैठकों के लिए इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी नेतृत्व को इस मामले में गलत सलाह मिली, जिससे शिवसेना की छवि सार्वजनिक रूप से प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक माहौल में एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ रहा है। कई क्षेत्रीय दलों के नेता भी एनडीए के साथ जुड़ने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। निरुपम के अनुसार, विकास एवं स्थिरता के लिए एनडीए सबसे मजबूत विकल्प है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बात करते हुए निरुपम ने समाजवादी पार्टी के अंदर चल रहे असंतोष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा व्यक्त दावों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के कई सांसद अलग होकर एनडीए का समर्थन कर सकते हैं। यह स्थिति प्रदेश की राजनीतिक दलों में तनाव और परिवर्तन के संकेत हैं।

निरुपम ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं द्वारा अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयासों के बावजूद उनके सांसदों और कार्यकर्ताओं के मन में नई सोच विकसित हो रही है। विपक्ष कमजोर होता जा रहा है, जबकि एनडीए का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वक्त में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

इस पूरी स्थिति में संजय निरुपम का मानना है कि देश के युवाओं को शांति एवं विकास की राह पर बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है, और राजनीति ऐसे विभाजनकारी तत्वों से मुक्त होनी चाहिए जो देश की एकता एवं समृद्धि में बाधक हों।

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