कर्ज चुकाने और निवेश करने में संतुलन बनाएं। पूरी तरह कर्ज-मुक्त होने की प्रतीक्षा न करें, क्योंकि आप कंपाउंडिंग का लाभ खो देंगे।

मासिक वेतन मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि पैसे को समझदारी से कैसे खर्च करें। जिन लोगों पर कर्ज है, उनके लिए यह सवाल और भी अहम हो जाता है। क्या पहले सारे कर्ज, लोन और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने चाहिए या फिर भविष्य के लिए निवेश शुरू करना चाहिए?
महंगाई लगातार बढ़ रही है, नौकरियाँ स्थिर नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर रिटायरमेंट तक हर ज़रूरत के लिए पैसे की आवश्यकता होती है। ऐसे में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए, यह समझना जरूरी है। कर्ज चुकाने से ब्याज का बोझ कम होता है, जबकि निवेश न करने से भविष्य की योजनाएँ अधूरी रह सकती हैं। असली समझदारी संतुलन बनाए रखने में है। सवाल यह नहीं कि कर्ज चुकाना है या निवेश करना है, बल्कि यह है कि अपनी आय, खर्च और उद्देश्यों के आधार पर कब किसे प्राथमिकता देनी चाहिए।
आइए जानते हैं —
पहले कर्ज चुकाएं या निवेश करें?
उत्तर: यह पूरी तरह आपके कर्ज के प्रकार और ब्याज दर पर निर्भर करता है।
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अगर कर्ज का ब्याज बहुत ज्यादा है, जैसे क्रेडिट कार्ड (30-40%) या पर्सनल लोन (12-18%), तो पहले इन्हें चुका देना चाहिए।
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यदि आपके कर्ज पर ब्याज कम है, जैसे होम लोन (7-9%) जो टैक्स छूट भी देता है, तो उसके साथ निवेश भी किया जा सकता है।
किस कर्ज को पहले चुकाना चाहिए?
सबसे अधिक ब्याज दर वाले कर्ज को पहले चुकाएं —
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क्रेडिट कार्ड कर्ज
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पर्सनल लोन
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आखिर में होम लोन
अगर ईएमआई पहले से चल रही है तो क्या निवेश टाल देना चाहिए?
यदि ईएमआई आपकी मासिक आय का 30-40% ले रही है और फिर भी थोड़ी बचत हो सकती है, तो छोटी रकम से निवेश शुरू करें। इससे वित्तीय अनुशासन बनता है और भविष्य के खर्चों या आपात स्थिति के लिए फंड तैयार होता है। आप एसआईपी (SIP) के जरिए ₹500 प्रति माह से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।
क्या कर्ज चुकाते हुए निवेश शुरू किया जा सकता है?
हाँ, निवेश हमेशा बड़ी रकम से शुरू करना जरूरी नहीं है। SIP या RD जैसी योजनाओं में ₹500 या ₹1000 मासिक से शुरुआत की जा सकती है।
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SIP (Systematic Investment Plan): इक्विटी म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश।
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PPF (Public Provident Fund): सुरक्षित और टैक्स-फ्री निवेश विकल्प।
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NPS (National Pension Scheme): रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए उपयुक्त।
कब कर्ज और निवेश को प्राथमिकता दें?
यदि कर्ज की ब्याज दर संभावित निवेश रिटर्न से अधिक है — तो पहले कर्ज चुकाएं।
यदि ब्याज दर निवेश रिटर्न से कम है — तो निवेश को प्राथमिकता दें।
उदाहरण: यदि कर्ज का ब्याज 14% है और निवेश पर रिटर्न 10% है, तो बेहतर होगा पहले कर्ज चुकाया जाए।
क्या होम लोन को लंबा चलाना ठीक है?
होम लोन ही एकमात्र ऐसा कर्ज है जिसमें टैक्स लाभ मिलता है (धारा 80C और 24B)। चूंकि इसकी ब्याज दर कम होती है, इसलिए स्थिर आय होने पर इसे जल्दी चुकाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कर्ज के साथ निवेश कैसे शुरू करें?
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आपातकालीन फंड: 6 महीने का खर्च सेविंग्स या एफडी में रखें।
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बीमा कवरेज: स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस जरूरी है।
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म्यूचुअल फंड SIP: धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं।
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पोस्ट ऑफिस स्कीम्स: सुरक्षित और स्थिर विकल्प।
टैक्स बचाने के लिए क्या निवेश जरूरी है?
हाँ, यदि आप टैक्स स्लैब में आते हैं तो 80C, 80D आदि धाराओं के अंतर्गत निवेश करें। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कर्ज की अनदेखी करें। टैक्स बचत निवेश के बाद बचे पैसे से कर्ज चुकाना बुद्धिमानी है।
सीमित आय वालों के लिए संतुलन का फार्मूला
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60:40 नियम अपनाएँ — 60% राशि कर्ज चुकाने में, 40% निवेश में लगाएँ।
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महीने की शुरुआत में बजट बनाएँ और फिजूलखर्ची घटाएँ।
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बोनस या टैक्स रिफंड से कर्ज की किस्तें चुकाएँ।
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निवेश रुकने न पाए, इसलिए SIP को ऑटोमेट करें।
तय करने का एक आसान नियम
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यदि ब्याज दर 10% या उससे अधिक है — पहले कर्ज चुकाएँ।
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यदि ब्याज दर 7% से कम है — निवेश को प्राथमिकता दें।
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यदि 7-10% के बीच है — दोनों को साथ रखें।
अनियमित आय वालों के लिए सुझाव
पहले आपातकालीन फंड बनाएं जो 6 महीने का खर्च कवर करे। फिर ऊँचे ब्याज वाले कर्ज जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान करें। जब नियमित नकदी प्रवाह सुनिश्चित हो जाए, तब ही निवेश शुरू करें। ऐसी स्थिति में RD जैसी लचीली योजनाएँ SIP से बेहतर विकल्प होती हैं।
क्या कर्ज चुकाने के साथ निवेश संभव है?
हाँ, दोनों साथ चल सकते हैं — बस अनुपात समझदारी से तय करें। यदि ईएमआई आय का 30-40% है, तो बाकी से निवेश करें। इससे कर्ज का बोझ घटेगा और भविष्य के लिए पूंजी तैयार होगी। PPF, NPS और SIP जैसे विकल्प लंबी अवधि में फायदेमंद हैं। समय के साथ कर्ज घटेगा और निवेश बढ़ेगा — इस तरह आर्थिक सुरक्षा दोनों दिशाओं से बनेगी।
