महाराष्ट्र में बच्चों के बीच एक ‘साइलेंट किलर’ बीमारी तेजी से बढ़ रही है। चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, यह बीमारी 6 साल की उम्र के बच्चों में भी देखने को मिल रही है।

साइलेंट किलर डिजीज इन चिल्ड्रेन
पहले केवल बड़ों में दिखाई देने वाला उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) अब बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। हाल ही में किए गए एक शोध में पाया गया है कि देश के 6 से 18 वर्ष के स्कूली बच्चों में हाइपरटेंशन और हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
अध्ययन से चौंकाने वाला खुलासा
मध्य भारत में किए गए एक अध्ययन में लगभग 1.4 प्रतिशत किशोरों में उच्च रक्तचाप पाया गया है। वहीं महाराष्ट्र में यह प्रतिशत और भी अधिक है। महाराष्ट्र की 10 स्कूलों में 2600 से अधिक विद्यार्थियों पर किए गए सर्वेक्षण में यह दर 7.5 प्रतिशत तक पहुंच गई।
सामान्य वजन वाले बच्चे भी प्रभावित
डॉक्टरों का कहना है कि उच्च रक्तचाप सिर्फ मोटे या स्थूल बच्चों में ही नहीं पाया गया, बल्कि सामान्य वजन वाले लगभग 5 प्रतिशत बच्चों में भी ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ पाया गया है। अध्ययनों के अनुसार, हाइपरटेंशन से ग्रसित लगभग 40 प्रतिशत बच्चों के दिल की संरचना में शुरुआती बदलाव देखे गए हैं।
दिल और किडनी पर असर
अक्सर बच्चों में हाइपरटेंशन के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि यह बीमारी ‘साइलेंट किलर’ कहलाती है। धीरे-धीरे यह दिल और गुर्दों को प्रभावित करने लगती है।
ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती निष्क्रिय जीवनशैली, अधिक स्क्रीन टाइम, तनाव, नींद की कमी और असंतुलित आहार इस समस्या के बड़े कारण हैं। ज्यादा नमक, तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ बच्चों के ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जांच और बीपी मापन अनिवार्य किया जाना चाहिए। समय पर निदान और जीवनशैली में बदलाव से बच्चों को इस ‘साइलेंट किलर’ से बचाया जा सकता है।
इसे ‘साइलेंट किलर’ क्यों कहते हैं?
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) अधिकतर मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है। कई लोगों को वर्षों तक यह समस्या रहती है, लेकिन उन्हें पता नहीं चलता। लेकिन जब ब्लड प्रेशर बहुत अधिक बढ़ जाता है (हाइपरटेंशन क्राइसिस), तब कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सामान्य लक्षण (जब दिखाई देते हैं)
-
सिरदर्द, खासकर सुबह के समय या तीव्र दर्द।
-
चक्कर आना या हल्का सिर घूमना।
-
सीने में दर्द या बेचैनी।
-
सांस लेने में कठिनाई या धड़कन तेज होना।
-
उल्टी या मिचली।
-
धुंधली दृष्टि या दृश्य में परिवर्तन।
-
चिंता, बेचैनी या भ्रम।
-
नाक से खून आना।
-
दिल की धड़कन अनियमित या बहुत तेज होना।
-
थकान।
-
चेहरा लाल होना या शरीर का तापमान बढ़ा हुआ महसूस होना।
आपातकालीन लक्षण
यदि ब्लड प्रेशर 189/120 mmHg से अधिक हो जाए और नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो यह हाईपरटेंशन इमरजेंसी हो सकती है:
-
तीव्र सिरदर्द या माइग्रेन जैसी पीड़ा।
-
सीने या पीठ में तेज दर्द।
-
सुन्नपन, कमजोरी या बोलने में कठिनाई।
-
दृष्टि में बदलाव या अंधेरा छा जाना।
-
सांस लेने में दिक्कत या हृदय रोग के संकेत।
इन लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
लक्षण व्यक्ति अनुसार बदल सकते हैं
उच्च रक्तचाप के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करते हैं और अक्सर रूटीन जांच में ही पता चलते हैं। यदि संदेह हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं। जीवनशैली में परिवर्तन (जैसे व्यायाम, सही आहार, नमक कम करना) और दवाओं से इसका नियंत्रण संभव है।
