
“लोकतंत्र की सुबह”
लोकतंत्र का सबसे सशक्त आधार है — जनता की भागीदारी।
और जब जनता बड़ी संख्या में मतदान करती है, तो वह न केवल अपनी सरकार चुनती है, बल्कि अपनी जिम्मेदारी भी निभाती है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में हुआ 64.66 प्रतिशत मतदान इस बात का सशक्त प्रमाण है कि बिहार का मतदाता अब पहले से कहीं अधिक जागरूक और सक्रिय है।
इस चुनाव को कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
पहला, यह मतदान प्रतिशत अब तक के बिहार के इतिहास में सबसे अधिक है।
दूसरा, इस बार महिला मतदाताओं और युवाओं की भूमिका निर्णायक रही।
तीसरा, तकनीकी पारदर्शिता ने मतदाताओं के विश्वास को और मजबूत किया।
1. लोकतांत्रिक चेतना का विकास
कभी बिहार में मतदान को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया माना जाता था। लेकिन अब यह एक जन-उत्सव बन चुका है।
लोग केवल “कौन जीतेगा” यह सोचकर नहीं, बल्कि “कौन बेहतर करेगा” यह सोचकर मतदान कर रहे हैं।
यह परिवर्तन लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रतीक है।
2. प्रशासनिक प्रबंधन
चुनाव आयोग ने इस बार चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई नई तकनीकी व्यवस्थाएँ लागू कीं —
जैसे 100% वेब-कास्टिंग, रंगीन फोटो वाली ईवीएम, और दिव्यांगों के लिए विशेष सहायता केंद्र।
इन प्रयासों ने जनता का विश्वास जीता और मतदान को सुगम बनाया।
3. सामाजिक समरसता
चुनाव के दिन किसी तरह की हिंसा या तनाव की खबर नहीं आई।
हर वर्ग, हर समुदाय के लोग शांति और अनुशासन के साथ मतदान करने पहुँचे।
यह दर्शाता है कि बिहार का समाज अब लोकतंत्र की मर्यादाओं को गहराई से समझने लगा है।
4. निष्कर्ष
64.66 प्रतिशत मतदान सिर्फ आँकड़ा नहीं है; यह उस जन-शक्ति का प्रतीक है जिसने यह तय कर लिया है कि वह अब अपने भविष्य की बागडोर खुद संभालेगी।
यह उस बदलाव की शुरुआत है जो न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश को प्रेरणा दे सकता है।
जब जनता इतनी बड़ी संख्या में निकलती है, तो लोकतंत्र की नींव और मज़बूत होती है।
और यही वह क्षण है जब कहा जा सकता है —
“बिहार ने लोकतंत्र को फिर एक बार नई ऊँचाई दी है।”
