“राज्य में बिजली दर वृद्धि रद्द”

बिजली दरों में किसी भी तरह का परिवर्तन करने से पहले ग्राहकों को अपनी राय देने का अवसर देना अनिवार्य है, लेकिन आयोग ने ग्राहकों की राय सुने बिना ही निर्णय लिया था। इसी वजह से कोर्ट ने इस निर्णय पर रोक लगा दी।
अक्टूबर महीने में उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट 35 से 95 पैसे तक का ईंधन अधिभार वसूला गया था, जिससे सभी ग्राहकों के बिल बढ़ गए थे। लेकिन अब नवंबर महीने के लिए इस ईंधन अधिभार को शून्य करने का आदेश महावितरण को दिया गया है। इससे अब उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी।
महावितरण ने कहा था कि बिजली की मांग बढ़ने से अन्य स्रोतों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई थी। मगर अब हाईकोर्ट के इस फैसले से महावितरण को बड़ा झटका और आम जनता को बड़ी राहत मिली है।
यह महाराष्ट्र राज्य के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। महावितरण द्वारा लिए गए बिजली दर वृद्धि के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके चलते राज्य में बिजली सस्ती हो गई है। हाईकोर्ट ने दिए गए आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए महावितरण को चार हफ्तों का समय दिया है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग के 28 मार्च के फैसले के कारण महावितरण को पांच वर्षों में 92 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की संभावना थी। इसलिए महावितरण ने आयोग के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर कर कुछ मुद्दे रखे। इसके बाद आयोग ने उन पर विचार करते हुए 25 जून को संशोधित आदेश जारी किया और इसका अमल 1 जुलाई से शुरू हुआ।
इसके खिलाफ कई कंपनियों ने मुंबई हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। इन सभी याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने विद्युत नियामक आयोग का आदेश रद्द कर दिया और 28 मार्च के बिजली दर कटौती आदेश के अनुसार बिल वसूलने के निर्देश दिए। इसके परिणामस्वरूप महावितरण के बिजली बिलों में लगभग 12 प्रतिशत की कमी होगी।
