खेल
हॉकी खेल उत्सव का खिताब दिग्विजय एकादश और तियरा स्टेडियम की टीम ने अपने नाम किया।

हॉकी, जो कभी भारत की पहचान थी, आज पुनः अपने गौरव की ओर लौटने का प्रयास कर रही है। सोनभद्र जैसी जगहों पर आयोजित प्रतियोगिताएँ इस पुनर्जागरण की आधारशिला हैं।
ऐसे आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के अनुशासन को भी दिशा देते हैं।
बालिका वर्ग में एंजल जैसी खिलाड़ी यह प्रमाण हैं कि अवसर मिले तो प्रतिभा किसी भी दीवार को पार कर सकती है।
राज्य सरकार और खेल निदेशालय को चाहिए कि इस ऊर्जा को निरंतर बनाए रखें — बेहतर मैदान, प्रशिक्षक और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
क्योंकि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम है।
सोनभद्र का यह आयोजन इसी विश्वास की नई पगडंडी है।
